मंगलवार, 26 जनवरी 2010

जय हिंद, जय हिन्दुस्थान..

ये तुलसी, ये मीरा . ये रसखान की मिटटी है.
ये गांधी, ये बिस्मिला  के बलिदान कि मिटटी है..
यही गूंजती है सदाए, अमन चैन की .
यह मेरे प्यारे हिन्दुस्थान की मिटटी है...

मै ही गंगा, मै ही जमना, मै ही चम्बल का पानी हू.
मै ही दुर्गा, मै ही रजिया, मै ही झांसी की रानी हू..
मेरे सिने में रहती है नमाजे और पूजा भी .
मेरी भाषा हिंदी है मै तो हिंदुस्थानी हू..

नहीं तू इस कदर धनवान बाबा .
ख़रीदे जो मेरा ईमान बाबा ..
ये छोड़ अब मंदिर -मस्जिदों के झगड़े .
अरे छेड एकता की तानबान..

नादान न बन कोई तेरा यार नहीं है  .
जुल्मत में साया भी वफादार नहीं है..
वो सिख है ना इसाई , ना हिन्दू ना मुस्लमा.
जिस शख्स में इन्शान का किरदार नही है......

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं


जय हिंद, जय हिन्दुस्थान..
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
प्रेमलता एम्. सेमलानी

3 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया!


गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ.

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना । गनतंत्र दिवस की शुभकामनायें

श्याम सखा 'श्याम' ने कहा…

नहीं तू इस कदर धनवान बाबा .
ख़रीदे जो मेरा ईमान बाबा ..
ये छोड़ अब मंदिर -मस्जिदों के झगड़े .
अरे छेड एकता की तानबान..